Once we start the journey, a million people come together to help – Sanjay Tiwari

“Warrior of Change” is an initiative to inspire positive change in the minds of people and empower them to start their own journey through powerful stories of real people striving hard to make a difference.

Our first Warrior of Change is one of the India’s most influential and powerful Filmmakers – Sanjay Tiwari who has carved a niche for himself in his early 20’s and is truly unstoppable. His movies are a mirror to harsh realities of our society – Be it a hunger stricken village “Bundelkhand” or indifference towards left-handed people “Ulte Hath”.

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 It was during my book launch of ” I am a Woman” by Aagaman Literary & Cultural Society, I was introduced to you for the first time, you showed up as an extremely warm and affectionate man. How do you maintain “boy next door” charm despite being one of the youngest and most accomplished Directors?

-hahaha , थैंक्स अलॉट तारीफ के लिए , लेकिन मैंने अभी बस  सीखना और करना शुरू किया है , और मुझे बहुत ख़ुशी है की सब लोग जो मेरे आस – पास हैं वो मेरे काम को appreciate करते हैं। जहाँ तक बात है manage करने की , तो वो सब बड़ी ही आसानी से मैं और मेरी टीम कर लेते हैं , सच कहूँ तो बड़ा मजा आता है मुझे।

  • Thanks a lot. I have just begun and I feel blessed to be around people who appreciate my work. I owe all the success to my team who make work look like fun.

 Inform us further about “Ulte Hath,” a globally acclaimed and award-winning film, which has won hearts of millions around the world.

उल्टे हाथ मेरी अब तक की सबसे बड़ी documentary-Fiction है , जिसको हमने उन लोगों के लिए बनाया है जो lefty हैं और उल्टे हाथ से अपने रोजमर्रा के काम करते हैं , २ साल पहले मेरा एक दोस्त (Shiv Pratap ) जो खुद भी lefty है उसने मुझे बताया कि कुछ लोग हैं जिनको हमेशा उनके सीधे हाथ से काम करने के लिए force किया जाता है , हम जबरदस्ती उनको उल्टे हाथ से सीधे हाथ पर शिफ्ट करने की कोशिश करते हैं और ये भूल जाते हैं की उनके लिए ये चीज़ कितनी फायदेमंद है या वो ऐसा करना चाहते हैं या नहीं।

तो वहां से एक आईडिया मिला और हमने काम किया। 15 minutes की इस फिल्म में हमने problems के साथ साथ solution की भी बात की है।

-” Ulte Hath” is by far the most successful films of Sage Productions. This focusses on problems faced by left-handed people especially in India where they are still treated as sick or malfunctioned. It is pathetic that we force them to start working with their right hands. One of our friends, Shiv Pratap inspired this documentary.Our intention is to change the mindsets of people towards left-handed people and stop the undue discrimination against them.

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अच्छी बात ये है , कि इस फिल्म को लोगों ने देखा और खूब appreciate किया। आने वाले टाइम में हम इस documentary की और भी screening करेंगे ताकि left handed के साथ होने वाले एक तरह के discrimination को रोका जा सके। और उनके लिए कुछ product भी उपलब्ध हो सके जो भारत में नहीं मिलते हैं , जैसे : ulte haath  की कैंची , या स्कूल में उल्टे हाथ वाली कुर्सी

New York’s magazine interviewed you under the classification of – “Profiles of Change Makers” Tell us more about it. 

इसके पीछे बड़ी मजेदार कहानी है , पिछले साल जब मैं अपनी टीम के साथ अलवर , राजेंद्र सिंह जी (Waterman of India ) से मिलने गए हुए थे तो वहां मेरी मुलाक़ात gandhi B मैगज़ीन की एडिटर से हुई , वो भी water conservation के एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में अलवर पहुंची हुई थी , बातों ही बातों में फिल्म का ज़िक्र हुआ तो उनको मेरी फिल्म का आईडिया बेहद पसंद आया और तकरीबन एक week  बाद मुझे  new York  से कॉल आया और उन्होंने इंटरव्यू को लेकर बात करना शुरू कर दिया , हमने अपनी फिल्म भी उनको दिखाई और उसके बाद उन्होंने एक शानदार कवर स्टोरी के साथ अपनी मैगज़ीन में हमको जगह दी

  • It has a very interesting story behind it, We were visiting Alwar for our documentary on Waterman of India- Rajendra Singh. We met the Editors of Gandhi B ( New York’s Magazine) at his home who were also discussing about projects related to water conservation.I mentioned about our movie and within a week, I got a call from them for the Interview. They saw the movie and were very impressed, they featured us in their magazine with a wonderful cover story.

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 You have worked on movies about visually challenged people, a hunger stricken village “Bundelkhand,” “women’s empowerment,” “malnutrition of women,” “left-handed people” and “homeless.” What is the inspiration behind all the projects?

जहाँ तक inspiration की बात है तो में कॉलेज से शुरू करूँगा ,  जब में कॉलेज में था , अपना graduation कर रहा था तब बस ऐसे ही शौक में कुछ फिल्म बनाना शुरू किया था और शुरुआत से सामाजिक कार्यों के लेकर मेरा रुझान कुछ ज्यादा रहा तो वैसे ही topics को choose करता था और विडियो बनाता था , बस वहीँ से इस चीज़ की शुरुआत हुई और जब लगतार ऐसे मुद्दों पर काम कर रहा था तो मेरी दोस्त Reena ने मुझे काफी प्रोत्साहित किया , और हमने साथ में काम करना शुरू कर दिया , हमने बुंदेलखंड  से  शुरू किया और अब सिलसिला water Conservation तक पहुँच गया है।

  • I got interested in making movies during my graduation days. I am more inclined towards social issues, therefore documentary movies dealing social vices. My friend, Reena stood like a pillar of my strength and encouraged me to focus completely on making movies. We started with Bundelkhand and now we have reached water conservation.

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हमको जहाँ भी कोई छोटी या बड़ी समस्या दिखी तो उसको लेकर Social Awareness और फिल्म मेकिंग करना शुरू कर दिया।  और आज हम कई  Social Issues  को लेकर फिल्म बना चुके हैं।  और अब आगे भी ऐसे ही फिल्म बनाने का प्लान है , ताकि हम भी अपनी skill से लोगों / समाज के हित में काम कर सकें।

 How has your filmmaking experience changed your beliefs, your outlook towards life and people? What surprising lessons have you learned along the way?

देखिये , जब हम अपने किसी निश्चित दायरे से बाहर निकलते हैं तो हमको समाज और लोगों के बारे में पता चलता है ,  समस्याओं को सुनते हैं , समझते हैं और फिर सोचते हैं कि क्या किया जा सकता है , शुरुआत में हम बहुत भावुक हो जाते थे , लेकिन film making से  हमको चीज़ें समझने में मदद मिली और इससे हमको सही /गलत के फ़र्क़ को भी ठीक ढंग से समझना आया।

-When we start looking, we see the society and problems, some of us begin to think about solutions, others feel sad and depressed about the situations. Through film making, we learned to differentiate between the right and the wrong.

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जब हम homeless peoples के लिए काम करना शुरू किया तो हमको लगता था ,  कि सड़कों पर रहने वाले हर इंसान को ज़रुरत है हमारी,  लेकिन उस पूरे campaign के दौरान हमको बहुत ही unexpected experience  मिला , कुछ लोगों ने हमारी मदद का सिर्फ फायदा उठाया और हमारे दिए गए कपडे बेच दिए ताकि वो नशा कर पाए। इस बात ने हमको बहुत कुछ पहले से प्लान करने और सोचने पर मजबूर किया  , और भी बहुत सी ऐसी घटनाएं हैं जिनकी वजह से हमारा perception बदला है।  ” बुंदेलखंड ” पर काम करते समय वहां के लोगों ने हमको और हमारी टीम को बहुत support किया , वो एक अलग experience था , हर साल हज़ारों लोग हमको हमारे collection Drive कैंपेन के लिए भी सपोर्ट करते हैं तो इन सब चीज़ों के देख कर अच्छा लगता है और motivation भी मिलता है। लेकिन  चीज़ों से हमको एक ही बात समझ आई कि अगर आप कुछ करने की ठान लेते हैं तो ऐसा नहीं है कि आप अकेले कर रह होते हैं , आपके साथ बहुत से लोग उस काम को करने में आपकी मदद करते हैं।

  • We worked for homeless people and felt how badly they need us. We faced our own issues as some of the volunteers backstabbed us and sold collected sweaters for their own benefits. Our perceptions changed while working on the movie for Bundelkhand. We have learned that there’s no looking back once we start the journey, a million people come together to help when required.

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 Your initiative to provide warmth to homeless people through “Sage Sweater Drive” has been utterly successful and rewarding. How does that make you feel?

मत पूछो। मुझे बहुत ख़ुशी होती है , जब कड़ाके की सर्दी में सड़क पर रहने वाला कोई परिवार बिना ठण्ड के आराम से सोता है। रात को 1 -2 बजे जब हमारी टीम कपडे बाँट रही होती है तो उस फील को यूँ ही बता पाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन आप सोचिये जब आपको भूख लगी हो या चाय पिने का मन कर रहा हो और सामने से कोई जाता हुआ आदमी  चाय थमा दे तो उस समय आपको जो ख़ुशी मिलेगी वही ख़ुशी उनके चेहरों पर देख कर अच्छा लगता है।  हम इस ड्राइव के दौरान उन एरिया को visit करते हैं जहाँ वाकई में लोग परेशान हैं और उनको ज़रुरत है , 4 सालों से हम सिर्फ दिल्ली या उसके आस पास के कुछ इलाकों में काम कर रहे थे लेकिन इस बार हमने अपना दायरा बढ़ाया है , दिल्ली से गाज़ियाबाद , नॉएडा , फरीदाबाद में भी इस बार खूब डोनेशन किया।

अच्छा लगा !

It is frightening how hundred of people sleep on the road on coldest of nights without anything to keep them warm. We started Sweater Drive to connect the middle class to lower class by allocating old sweaters at one place and distributing them to the poor.

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 You come across as a deeply emotional and sensitive human being. When was the last time you cried?

Hahahahahahahhaa … अक्सर लोग मुझे ऐसे पूछते हैं , लेकिन सच बताऊँ तो मुझे भी ठीक से याद नहीं कि मैं कब रोया था। आप सबका प्यार इतना है की रोने की नौबत ही नहीं आती।

The love of people keeps me happy and I have no time to cry.

“Sage Productions” could easily be one of the most kick-ass teams to work with. What do you have to say about the people who helped you realise your dream?

सच बताऊँ तो मुझे कुछ लोगों ने बहुत मदद की , Sage एक सपना था जो collage के टाइम सोचा गया था जिसे मैं आज जी रहा हूँ , और जितना हो पा रहा है कर रहा हूँ और ये में अकेले कभी नहीं कर सकता था , sage की पूरी टीम को इसका क्रेडिट जाता है

Reena Rai , ने हमेशा मेरी मदद की और हमने साथ में एक अच्छी टीम बनाई और काम करना शुरू किया। जब अच्छे results आने लगे तो लगा कि हाँ , हम सही ट्रैक पर हैं।

film making एक Team  Work है , बिना एक आर्टिस्ट के सब अकेले हैं , लेकिन मुझे ख़ुशी है कि हमारे पास Tushar Sharma , Aarushi , Abhishek Gokhlani , Sachin , Madhav, shiv pratap  जैसे अच्छे लोग हैं। और हम मिलकर मेहनत कर रहे हैं।

Our Team has worked very hard -Tushar Sharma , Aarushi , Abhishek Gokhlani , Sachin , Madhav, shiv pratap and Reena Rai.

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 Share your views about Bollywood Filmmakers that have started working on untouched social issues rather than creating a commercial 100 crore film. Do you believe that Artists have a tremendous responsibility and capability to bring a change in the society?

हाँ बिलकुल , मुझे तो लगता हैं कि बस सोचने भर की देर है , आप एक बार सोच के देखो , फिर देखना,  लोग आपके साथ होंगे और आपको बस लगतार लगे रहना है , जहाँ तक बात Bollywood Film makers की है तो वहां मामला थोड़ा अलग है लेकिन साल भर में कुछ अछि फिल्म्स देखने को मिल जाती हैं , सिनेमा बदल रहा है , आजकल शार्ट फिल्म का मार्किट भी खूब बढ़ा है और बड़े बड़े डायरेक्टर , एक्टर social issues को लेकर शार्ट फिल्म बना रहे हैं।  उसे देखकर लगता है कि  घिसे पिटे topics से लोग बोर हो चुके हैं।  और कुछ नया देखना चाहते हैं।

Cinema is changing, some of the Bollywood film makers are focussing on social vices and making films about it.

What is your message for the youth of India who wants a change in our society?

मैं बस यही कहूंगा कि जितना हो सके उतना तो हम कर ही सकते हैं , तो अगर सब अपने अपने हिस्से का करेंगे तो एक दिन वो सब होगा जो हम सोच के बैठे हैं।  अपने अपने हिस्से का करते रहिये , खुश रहिये और खुशियां बांटते रहिये।

Do your bit. Every contribution matters. Stay Happy and spread joy wherever you go

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It was an honour to interview Sanjay Tiwari, If you would like to know more about him or watch his movies, hop on the Official Website

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9 thoughts on “Once we start the journey, a million people come together to help – Sanjay Tiwari

  1. Wonderful Projects undertaken by Sanjay! I am a lefty myself and I know how much we have to go through even outside India.

    I look forward to reading more on Warrior of Change.

    ❤ Nikita

    Like

  2. Pingback: Warrior of Change – Ashish Sharma – The Enchantress

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